Saturday, March 16, 2024

उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श

उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श

कोई भी व्यक्ति लेखन का गुण लेकर पैदा नहीं होता. बोलने,सोचने,समझने की शक्तियां धीरे धीरे विकसित होती जाती हैं, बोलने के साथ अभिव्यक्त करने की देह भाषा की तुलना में लिखकर शब्दों में अभिव्यक्ति का माध्यम अपेक्षाकृत रूप से बहुत लंबे अंतराल के बाद अर्जित होता है. वातावरण और उचित पर्यावरण में व्यक्ति के भीतर लिखने पढ़ने की रुचि अवश्य जागृत होने लगती है. मन में उठे विचारों को वह शब्द देने लगता है. क्या जो कुछ वह अभिव्यक्त करता है सब कुछ साहित्य सृजन होता है? हर लिखा साहित्य की श्रेणी में नहीं आता. यह एक वृहद विषय है.


आज हम हिंदी साहित्य की बात करें तो तमाम मतांतरों के बीच आज के समय में व्यंग्य के बाद लघुकथा को सबसे नवीनतम विधा के रूप में मान्यता मिली है. हाल फिलहाल आज के व्यस्त समय में जब साहित्य आम लोगों की प्राथमिक रुचि में नहीं है तब लघुकथा जैसी कम समय लेने वाली रचना पाठकों और रचनाकारों को कुछ अधिक आकर्षित करने लगी है. यह बिल्कुल परीक्षित तथ्य है कि रचना वही हमारे भीतर उतरती है जिसमें संप्रेषण की सफलता के साथ सौंदर्य हो. इसीलिए हरेक विधा का अपना एक सौंदर्य शास्त्र भी विकसित हो जाता है. सौंदर्य शास्त्र के अनुरूप रचना का सृजन उसकी महत्ता और प्रभाव को बढ़ाता है.


व्यंग्य विधा और लघुकथा विधा का सौंदर्य शास्त्र अपने विकास के क्रम में है. ऐसे में बहुतेरे प्रयास भी हो रहे हैं. श्री दीपक गिरकर जैसे प्रबुद्ध पाठक, समीक्षक और रचनाकार ने इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए ' उत्कृष्ट लघुकथा विमर्श ' पुस्तक के माध्यम से बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है. पुस्तक में लघुकथा को लेकर विभिन्न विद्वानों के छब्बीस आलेख हैं. लघुकथा विधा में सृजनरत नव लेखकों के साथ साथ पुराने लेखकों को भी दिशा देने में इनकी उपयोगिता असंदिग्ध है.

इस पुस्तक के दूसरे खंड में अट्ठाइस श्रेष्ठ लघुकथाओं को भी संकलित किया गया है जिनसे विभिन्न शैलियों में और भिन्न विचारों व विषयों को विधा में अभिव्यक्ति देने की कला को निखारने में सहायता मिलती है, समझ का विकास होता है.


लेखन में रुचि रखने वाले व्यक्ति को खासतौर से जो लघुकथा लिखने की कोशिश करता है, एक बार इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए. श्री दीपक गिरकर जी को इस पहल के लिए हार्दिक बधाई. सीहोर के शिवना प्रकाशन ने इसे बहुत बढ़िया प्रकाशित किया है. आकर्षक आवरण चित्रकार श्री संदीप राशिनकर ने तैयार किया है जो विषयवस्तु की गंभीरता को अभिव्यक्त करता है.  निश्चित ही उत्कर्ष लघुकथा विमर्श का एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पुस्तक के रूप में स्वागत किया जाना चाहिए.



( पुस्तक : उत्कर्ष लघुकथा विमर्श, संपादक : दीपक गिरकर, प्रकाशक : शिवना प्रकाशन, सीहोर, कीमत : 400 रुपए)


ब्रजेश कानूनगो

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