पोटली : संवेदनाओं का रेखांकन
सीमा व्यास एक ऐसी संवेदनशील कथाकार हैं जो रोजमर्रा के हर क्षण में किसी लघुकथा को सृजित करने की सामर्थ्य रखती हैं।
'पोटली' सीमा जी का पहला लघुकथा संग्रह है जिसमें उन्होंने जीवन का सफर करते हुए ऐसे कुछ प्रसंगों, आचार - व्यवहार और संवादों को रेखांकित किया है जिनसे उनका भावुक मन संवेदित हुआ है।
अपने भीतर उभरे क्षोभ और अनुभूतियों को वे कई बार हूबहू हमारे सामने रख देती हैं। किसी बड़ी कहानी के किसी बहुत मार्मिक या व्यंजनापूर्ण अंश को कुछ इस तरह अभिव्यक्त करती हैं कि पाठक उनकी अनुभूतियों को अपनी अनुभूति महसूस करने लगता है।
कलागुरु विष्णु चिंचालकर जी के बारे में कहा जाता है कि वे दीवारों पर निकले पोपड़ों या बिखरी चीजों के आसपास कुछ ऐसी रेखाएं खींच देते थे कि वे घेरे किसी कलाकृति का रूप धर लेती थीं। सीमा व्यास जीवन के प्रसंगों को अपनी संवेदनाओं और शब्दों से ऐसे ही चिन्हित कर खूबसूरत और सार्थक लघुकथाओं में बदल देती हैं। लघुकथाओं की यही विशिष्ठता उन्हे अन्यों से अलग पहचान देती हैं।
उनकी लघुकथाओं का पाठ हमारे भीतर किसी कहानी के विस्तार की तरह खुलने लगता है। यह अनुभव पाठक को 'पोटली' खोलने के बाद ही मिल सकता है।
इस संग्रह की एक विशेषता यह भी है कि वनिका प्रकाशन,बिजनौर से प्रकाशित इस पुस्तक का अर्थपूर्ण आवरण प्रसिद्ध चित्रकार और कार्टूनिस्ट श्री इस्माइल लहरी जी ने तैयार किया है। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मासिंह लिखित भूमिका लेखक के सृजन को रेखांकित करने और पाठक को लघुकथाओं के मर्म तक पहुंचने में मदद करती है।
संग्रह की सुंदर लघुकथाओं के लिए सीमा व्यास जी को बधाई और शुभकामनाएं।
(पुस्तक : पोटली, लेखिका : सीमा व्यास, प्रकाशक : वानिका प्रकाशन, बिजनौर, कीमत : 180 रुपए)
ब्रजेश कानूनगो
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